शुक्रिया शुक्रिया मां
शुक्रिया शुक्रिया माँ तेरा शुक्रिया,
मैने मांगा जो उससे भी ज्यादा दिया।
मैने मांगा था माथे का टीका ओ माँ,
तूने सिन्दूर लगा कर सुहागन किया।
शुक्रिया शुक्रिया...
मैने मांगी थी माथे की बिन्दीया ओ माँ,
तूने चुनरि ओढा कर सुहागन किया।
शुक्रिया शुक्रिया...
मैने मांगी थी हाथों मे चूडियां ओ माँ,
तूने मेहंदी लगाकर सुहागन किया।
शुक्रिया शुक्रिया...
मैने मांगी थी पैरों मे पायल ओ माँ,
तूने महावर लगा कर सुहागन किया।
शुक्रिया शुक्रिया...
मैने मांगी थी सखियाँ सहेलियां ओ माँ,
तूने सैयां मिला कर सुहागन किया।
शुक्रिया शुक्रिया माँ तेरा शुक्रिया
मैने मांगा जो उससे भी ज्यादा दिया।
श्रेणी : दुर्गा भजन
New mata rani bhajan शुक्रिया शुक्रिया माँ तेरा शुक्रिया ।।Sukriya sukriya maa tera sukriya।।shalu
यह भजन "कुहूके कोयलिया तोर अंगना म" और "शुक्रिया शुक्रिया माँ तेरा शुक्रिया" देवी माँ के प्रति गहरी भक्ति और आभार का प्रतीक है। पहले भजन में, छत्तीसगढ़ी भाषा में बयां किया गया है कि कैसे कोयलियाँ माँ के आंगन में कुहुकती हैं और भक्त अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हैं। इसमें भगवान की महिमा और भक्ति के रस का अनुभव करने की बात की गई है, साथ ही यह भी बताया गया है कि भक्तों की ज़बान और विचार केवल भगवान की भक्ति के लिए समर्पित होते हैं।
दूसरा भजन "शुक्रिया शुक्रिया माँ तेरा शुक्रिया" पूरी तरह से देवी माँ के प्रति आभार व्यक्त करने वाला है। इसमें भजन गायक ने मां से जो भी मांगा, उस पर उनसे अधिक प्राप्त किया। भजन में माँ द्वारा दिए गए आशीर्वाद और उनकी कृपा का उल्लेख है, जैसे कि माथे का टीका, हाथों में चूड़ियां, पैरों में पायल, और जीवन में सखियाँ और सहेलियाँ - ये सब माँ की आशीर्वाद से ही संभव हुआ।
यह भजन श्रद्धा, समर्पण और भगवान के प्रति पूरी तरह से आस्था और प्रेम को दर्शाता है। दोनों भजन दुर्गा भजन श्रेणी में आते हैं, जो खासतौर पर नवरात्रि के दौरान प्रचलित होते हैं और भक्तों के दिलों में माँ की भक्ति का अहसास कराते हैं।