सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां
सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां,
कचया घरा नू माए पुल ना जावी,
बगे बगे शेर उते बैन बाली मां,
कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी,
बड़ियां उमीदा तेरे आउन दिया रखिया,
तेरे दर आऊन वाली हवावा माए तकिया,
सबना दे घर फेरा पान वाली मां,
मेरे घर फेरा पाना पुल ना जावी,
सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां,
कचया घरा नू माए पुल ना जावी,
बगे बगे शेर उते बैन बाली मां,
कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी,
नीके जए घर बिच मंदिर बनाया मां,
रीझा नाल मइया तेरा आसन सजाया मां,
उचियां सिंघसना ते बै़न वाली मां,
आसन गरीबा वाला पुल ना जावी,
सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां,
कचया घरा नू माए पुल ना जावी,
बगे बगे शेर उते बैन बाली मां,
कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी,
बचया नु मान तेरा मान कदे तोड़ी ना,
अपने लाला कोलो मुख कदे मोड़ी ना,
रोंदे होये चेहरे नु हसान वाली मां,
हंसना हंसाना मैनू पुल न जावी,
सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां,
कचया घरा नू माए पुल ना जावी,
हर बार मैं ही आऊँदी तू बी कदे आबीं मां,
घर मेरे आके सीने ठंड पावीं मां,
पगता नु गल नाल लान वाली मां,
मैनु वी तु गल लाना पुल ना जावी,
सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां,
कचया घरा नू माए पुल ना जावी,
बगे बगे शेर उते बैन बाली मां,
कुली ए गरीबा बाली पुल ना जाबी,
श्रेणी : दुर्गा भजन
बगे बगे शेर उते बैन वाली मां कुली ए गरीबा वाली पुल ना जावी | माता रानी का भजन जरूर सुने | #navratri
यह भजन "सोणे सोणे मंदरा च रहन वाली मां" देवी माँ के प्रति असीम भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। इस भजन में माता रानी की महिमा का वर्णन किया गया है, जिनकी उपस्थिति हर जगह, हर एक पल महसूस होती है। भजन में माँ को सोने-सोने मंदिरों में रहने वाली, बघे-बघे शेरों पर बिठी हुई, और गरीबी में भी हर भक्त की मदद करने वाली बताया गया है।
भजन की पहली पंक्तियाँ माँ के आशीर्वाद और उनकी सुरक्षा को लेकर हैं। माँ का घर कच्चा होने के बावजूद वह भक्तों को अपने आशीर्वाद से संबल देती हैं। यहां तक कि शेरों पर बैठी माँ की महिमा को भी दर्शाया गया है, जिनकी शक्ति अपार है।
इसके बाद भजन में माँ के दर पर आने वाली हवाओं का भी जिक्र है, जो भक्तों को राहत देती हैं और उनके घरों में सुख-शांति लाती हैं। माँ का दर हमेशा खुला रहता है, जहां हर किसी को स्वागत किया जाता है।
आगे, भजन में यह बताया गया है कि एक भक्त अपने घर में मंदिर बनाता है और माँ के आसन को सजा कर उन्हें अपने जीवन में शामिल करता है। माँ का सिंहासन ऊंचा है, लेकिन उनका आशीर्वाद और प्यार हर किसी के लिए समान है।
भजन के अंत में माँ के आशीर्वाद से हर दुखी व्यक्ति को मुस्कान मिलती है। वो हर व्यक्ति की तकलीफ को समझती हैं और उनका हंसते-हंसते इलाज करती हैं। अंत में यह भजन एक आस्था और विश्वास के रूप में समाप्त होता है, जिसमें यह कहा जाता है कि हर भक्त माँ से एक सच्ची और अनमोल सौगात प्राप्त करता है, जो उसे जीवन में शांति और संतुलन देती है।
यह भजन नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से श्रद्धालुओं में माँ के प्रति प्रेम और भक्ति को उजागर करता है और भक्ति संगीत के रूप में उनकी शक्ति का अहसास कराता है।