रंग हारा वाले दे चढ़ गए
रंग हारांवाले दे चढ़ गये,
रंग होर चढ़ाके की ल लैना,
रंग होर चढ़ाके की लैना,
नैना विच सतगुरु वस गये,
कोई होर वसाके की ल लैना,
तेरे नाम दा फड़ लेया पल्ला ऐ,
मैनूं लोकी केंहदे झल्ला ऐ,
नी मैं अपने शाम दी कमली,
नी मैं बनके सयाणी की ल लैना,
रंग हारांवाले दे चढ़ गये,
रंग होर चढ़ाके की ल लैना,
रंग होर चढ़ाके की ल लैना,
नैना विच सतगुरु वस गये,
कोई होर वसाके की ल लैना,
गल्ल मुकदी ऐ मुकाणी ऐ,
तेरे नाम दी लगन लगानी ऐ,
मेरा बन गया हारांवाला,
नी मैं सबनू बनाके की ल लैना,
रंग हारांवाले दे चढ़ गये,
रंग होर चढ़ाके की ल लैना,
रंग होर चढ़ाके की ल लैना,
नैना विच सतगुरु वस गये,
कोई होर वसाके की ल लैना,
असी अपना शाम मनावांगे,
दुनिया तों पिछा छुड़ावांगे,
सानू तेरी चौखट मिल गई,
दर दर ते जाके की ल लैना,
रंग हारांवाले दे चढ़ गये,
रंग होर चढ़ाके की ल लैना
रंग होर चढ़ाके की ल लैना,
नैना विच सतगुरु वस गये,
कोई होर वसाके की ल लैना।
तुसा नाम दा जाम पिलाया ऐ,
तुसी सानू मस्त बनाया ऐ,
सानू नाम दी मस्ती चढ़ गई,
असी होर चढ़ाके की ल लैना
रंग हारांवाले दे चढ़ गये,
रंग होर चढ़ाके की ल लैना,
रंग होर चढ़ाके की ल ल लैना,
नैना विच सतगुरु वस गये,
कोई होर वसाके की लै लैना
श्रेणी : कृष्ण भजन
🙏रंगहारा वाले दे चढ़ गए🙏 जय श्री शाम 🙏इस 👌 भजन को जरूर सुने🙏
"रंग हारांवाले दे चढ़ गये" एक अत्यंत भावपूर्ण और आध्यात्मिक भजन है, जो भक्ति की गहराई में डूबे भक्त की अनुभूति को दर्शाता है। यह भजन श्री श्याम प्रभु की महिमा को उजागर करता है और बताता है कि जब भक्त अपने आराध्य के प्रेम में रंग जाता है, तो उसे किसी अन्य रंग या आकर्षण की जरूरत नहीं रहती।
गीत के बोल प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण से भरे हुए हैं – "नैना विच सतगुरु वस गये, कोई होर वसाके की ल लैना", जो इस बात को दर्शाते हैं कि जब भक्त के हृदय में सतगुरु बस जाते हैं, तो फिर किसी और चीज की आवश्यकता ही नहीं रहती।
भजन में यह भी कहा गया है कि "तेरे नाम दा फड़ लेया पल्ला ऐ, मैनूं लोकी केंहदे झल्ला ऐ", अर्थात जब कोई भक्त अपने आराध्य के रंग में रंग जाता है, तो दुनिया उसे पागल कहती है, लेकिन वह इस प्रेम को ही अपनी सबसे बड़ी दौलत मानता है।
"सानू तेरी चौखट मिल गई, दर दर ते जाके की ल लैना" – यह पंक्तियाँ भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाती हैं, जब भक्त को अपने प्रभु का सानिध्य मिल जाता है, तब उसे संसार की किसी भी चीज़ की कोई चाहत नहीं रहती।
यह भजन सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो भक्ति के रंग में रंगे हुए भक्तों को श्री श्याम प्रभु की भक्ति में डूबने के लिए प्रेरित करता है। जय श्री श्याम!