राम तेरे नाम से पानी में पत्थर तेर रहे
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
देवता सारे खड़े हैं, तेरी लीला देख रहे !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
पल भर में ही तूने, राम सेतु बनाया हैं,
फिर भी तेरी महिमा को, रावण जान न पाया हैं !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
बजरंग को दी हैं भक्ति, उसने माँ का पता लगाया हैं,
लंका में जाकर के उसने, लंका को जलाया हैं !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
अंगद को दी हैं शक्ति, उसने ऐसा पैर जमाया हैं,
लंकापति खुद आया, पर उसको हिला न पाया हैं !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
वचन दिया जो पिता को, वो वचन तूने निभाया हैं,
वचनो का रखना मान, प्रभु तूने ही सिखाया हैं !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
सबरी के खाये बेर, तूने उसका मान बढ़ाया हैं,
अपने भक्तो को तूने, भक्ति का ज्ञान कराया हैं !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
रावण ने हर ली सीता, तूने रावण को हराया हैं,
पल भर में किया ढेर, तूने ऐसा बाण चलाया हैं !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
क्या करू गुणगान प्रभु, ऐसी तेरी माया हैं,
तेरी माया को भगवन, कोई समझ नहीं पाया हैं !
राम तेरे नाम से, पानी में पत्थर तेर रहे,
Lyri cs- Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : राम भजन
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"राम तेरे नाम से पानी में पत्थर तेर रहे" एक अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिमय भजन है, जो प्रभु श्रीराम की महिमा का गुणगान करता है। इस भजन की रचना जय प्रकाश वर्मा, इंदौर ने की है। भजन में श्रीराम के अद्भुत चमत्कारों और उनके भक्तों की भक्ति का उल्लेख किया गया है, जिससे यह भजन सुनने वालों के हृदय में श्रद्धा और भक्ति की भावना को जागृत करता है।
भजन की प्रत्येक पंक्ति में श्रीराम के अलौकिक चरित्र और उनकी अनंत कृपा को दर्शाया गया है। यह भजन बताता है कि जब प्रभु श्रीराम का नाम लिया जाता है, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। पानी में पत्थर तैर सकते हैं, भक्तों को अपार शक्ति प्राप्त होती है, और अधर्म का अंत निश्चित हो जाता है। श्रीराम ने अपने भक्तों को अपार शक्ति प्रदान की—चाहे वह हनुमान जी हों, जिन्होंने माता सीता का पता लगाया और लंका को जलाया, या अंगद हों, जिन्होंने अपनी दृढ़ता से रावण को पराजित कर दिया।
भजन यह भी दर्शाता है कि श्रीराम ने सदैव अपने भक्तों का मान बढ़ाया। उन्होंने शबरी के जूठे बेर खाकर यह प्रमाणित किया कि भक्ति में जाति-पाति और ऊँच-नीच का कोई भेदभाव नहीं होता। अपने वचनों के प्रति अटल रहने वाले श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन कर यह सिखाया कि धर्म और कर्तव्य से बढ़कर कुछ भी नहीं।
यह भजन रामायण के प्रमुख प्रसंगों को संजोते हुए प्रभु श्रीराम की लीलाओं और उनके प्रभाव का अद्भुत वर्णन करता है। यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि रामभक्ति की एक प्रेरणादायक रचना है, जो भक्तों को श्रीराम की महिमा का अनुभव कराती है।