पाके घूंघरू नचा मैं दर तेरे
पाके घुंघरू नचा मैं दर तेरे,
मैया जी मैं फकीर हो गया,
कनी मुंदरा खुले ने वाल मेरे,
मईया जी मैं फ़कीर हो गया,
पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरे,
रात दी उडीक नहियो दिन दी वी होश ना,
बस तेनु मिलने दा दिल विच जोश माँ,
तेरे चरना च ला ले ने डेरे,
मईया जी मैं फ़कीर हो गया,
पा के घुंघरू नचा मैं दर तेरे,
जिनु वी फकीरी रंग चड़ जाये अमिये,
कोई वी न फेर ओहनू रंग भाये अमिये,
दूर चिंता दे होये ने हनेरे,
मईया जी मैं फ़कीर हो गया,
रमता जोगी पागल फकर कहंदा कोई दीवाना ऐ,
हालत मेरी देख के मेनू कहंदा कोई मस्ताना ऐ,
दिन रात लावा भवना दे फेरे,
मईया जी मैं फ़कीर हो गया,
पा के घुंघरू नचा मैं दर तेरे,
किसे दी नही लोड मेनू किसे दी ना चाह ऐ,
दर्शी निमानेया ने मली तेरी राह ऐ,
नजर आवे तू माँ चार चुफेरे,
मियाँ जी मैं फ़कीर हो गया,
पा के घुंगरू नचा मैं दर तेरेपा के घुंघरू नचा मैं दर तेरे,
श्रेणी : दुर्गा भजन
🙏🏽पाके घुंघरू नचा मैं दर तेरे ,मईया जी मैं फकीर हो गया🌹, इस सुन्दर भजन को जरूर सुने🙏🏻
"पाके घुंघरू नचा मैं दर तेरे" एक भावपूर्ण और श्रद्धायुक्त भजन है, जिसमें भक्त अपनी समर्पण और भक्ति की भावना को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त माँ दुर्गा के चरणों में अपनी निस्वार्थ भक्ति को प्रस्तुत कर रहा है और इस भक्ति के माध्यम से अपनी आत्मा की शांति और संतोष प्राप्त कर रहा है।
भजन में वर्णित है कि कैसे भक्त माँ के दर पर पहुँचने के बाद घुंघरू की ध्वनि से नृत्य करता है, यह दर्शाता है कि उसने अपनी सारी इच्छाओं और सांसारिक बंधनों को छोड़कर पूर्ण रूप से माँ की सेवा और भक्ति में समर्पण कर दिया है। उसे अब न किसी चीज़ की चाहत है, न कोई चिंता, और न ही किसी अन्य वस्तु की आवश्यकता। वह माँ की भक्ति में लीन है, जैसे एक फकीर जो केवल अपने प्रभु की सेवा में मग्न रहता है।
भजन में यह भी दिखाया गया है कि जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से भक्ति करता है, तो उसकी चिंताएँ और परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं और उसकी आत्मा को शांति मिलती है। भक्त का विश्वास और प्रेम माँ दुर्गा के प्रति इतना प्रगाढ़ होता है कि वह केवल उनके चरणों में सुख और शांति की तलाश करता है।
इस भजन के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि अगर हम अपने मन, वचन, और क्रिया से प्रभु के प्रति श्रद्धा और समर्पण रखते हैं, तो वह हमारे जीवन को सुखमय बना देती है।
यह भजन माँ दुर्गा की भक्ति में रंगी हुई एक आत्मीय श्रद्धांजलि है, जो हर भक्त के दिल में अपने आराध्य के प्रति प्यार और विश्वास को बढ़ाता है।