कख कख वणां दा मैं फरोलदी रही
कख कख, वनों का, छानती रही ll
तुझे, शेरांवाली, मैं, टोहती रही ll
जंगलों में, तुझे, आवाजें, देती रही,
हर पल, दाती, तुझे ही, पुकारती रही ll
जय माता दी, मुख से, बोलती रही l
तुझे, शेरांवाली, मैं, टोहती रही l
कख कख, वनों का, छानती रही,,,
दुनिया ने, मुझसे, सब कुछ, छीन लिया,
तभी तो, फकीरों जैसा, हाल मेरा हो गया ll
मीठा मीठा, ज़हर, मैं तो, घोलती रही l
तुझे, शेरांवाली, मैं, टोहती रही l
कख कख, वनों का, छानती रही,,,
दुनिया ने, ठुकराया, तू भी, ठुकराए ना,
रख मेरी, लाज दाती, मुँह तू छुपाए ना ll
तुझे, हर पल, मैं, बोलती रही l
तुझे, शेरांवाली, मैं, टोहती रही l
कख कख, वनों का, छानती रही,,,
अपलोडर - अनिलरामूर्ति भोपाल
श्रेणी : दुर्गा भजन
नवरात्रि स्पेशल भजन 🙏माता रानी का नया और धमाकेदार भजन तेनु शेरावालिए मैं टोलदी रही Mata bhajan💃
"तेनु शेरावालिए मैं टोलदी रही" एक भावपूर्ण भजन है जिसमें भक्त अपनी गहरी श्रद्धा और भक्ति से माँ दुर्गा को पुकारता है। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो अपनी कठिनाइयों के बावजूद माँ के दर पर आकर उनसे सहायता और आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं। भजन में शेरांवाली माँ के प्रति अपार भक्ति, विश्वास और समर्पण का अद्भुत वर्णन किया गया है।
भजन की शुरुआत में कहा गया है कि भक्त जंगलों में, वनों में, माँ को ढूंढ़ता है और उनकी आवाज़ों में उन्हें पुकारता है। यह दर्शाता है कि भक्त चाहे जहां भी हो, माँ के प्रति उसकी भक्ति कभी कम नहीं होती। वह हर परिस्थिति में माँ के आशीर्वाद की तलाश में रहता है।
इसके बाद भजन में भक्त कहता है कि दुनिया ने उसे सब कुछ छीन लिया, और वह फकीरों की तरह जीवन जी रहा है। फिर भी वह मीठे ज़हर को पीते हुए माँ की तलाश में जुटा रहता है, क्योंकि उसका विश्वास माँ में दृढ़ है। यह बात यह दर्शाती है कि कठिनाइयों और दुखों के बावजूद, भक्त का प्रेम और विश्वास माँ पर कभी कम नहीं होता।
अगले भाग में, भक्त यह कहता है कि जब दुनिया ने उसे ठुकरा दिया, तब माँ के पास ही उसकी असली पहचान और सम्मान है। वह माँ से लाज रखने की प्रार्थना करता है और चाहता है कि माँ उसका हाथ पकड़कर उसे सबकुछ दे दें। यह दर्शाता है कि भक्त केवल माँ के दर पर ही अपनी सभी समस्याओं का समाधान पाता है।
"तेनु शेरावालिए मैं टोलदी रही" भजन माँ के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करता है। यह नवरात्रि के दौरान खास रूप से गाया जाता है, जब भक्त अपनी समर्पण भाव से माँ की आराधना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनके दर पर आते हैं। यह भजन उनके जीवन में माँ के आशीर्वाद से खुशी और शांति लाने की एक सुंदर कोशिश है।