जय हो मंदर सोहना बनया
जय हो, मंदिर सोहणा बनिया,
जय हो, मंदिर सोहणा बनिया ll
दातिए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
महारानीए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
दातिए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
हाथ में गढ़वा, गंगाजल भरिया ll
दातिए,,, स्नान, कराया तेरे सेवकों ने l
महारानीए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
जय हो, मंदिर सोहणा बनिया...
हाथ में कटोरी, केसर रोली ll
दातिए,,, तिलक, लगाया तेरे सेवकों ने l
महारानीए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
जय हो, मंदिर सोहणा बनिया...
हाथ में टोकरा, फूलों का पकड़ा ll
दातिए,,, हार, चढ़ाया तेरे सेवकों ने l
महारानीए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
जय हो, मंदिर सोहणा बनिया...
पान सुपारी, ध्वजा नरेला ll
दातिए,,, भेंट, चढ़ाई तेरे सेवकों ने l
महारानीए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
जय हो, मंदिर सोहणा बनिया...
हाथ में थाली, मेवा भरिया ll
दातिए,,, भोग, लगाया तेरे सेवकों ने l
महारानीए,,, मंदिर, बनाया तेरे सेवकों ने l
जय हो, मंदिर सोहणा बनिया...
अपलोडर - अनिलरामूर्ती भोपाल
श्रेणी : दुर्गा भजन
#navratri#bhentजय हो मंदर सोहना बनया दातिए मंदर बनाया तेरयां सेवका@RSBhajanMandaliचैनल से जुड़ें
यह भजन "जय हो, मंदिर सोहणा बनिया" एक दिव्य और भक्तिपूर्ण भजन है जो देवी दुर्गा की आराधना के लिए गाया जाता है। इसमें भजनकार ने देवी के मंदिर की सुंदरता और भक्ति से जुड़ी विभिन्न क्रियाओं का सुंदर वर्णन किया है। प्रत्येक कविता में मंदिर के निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं जैसे गंगाजल से स्नान कराना, तिलक लगाना, फूलों का हार चढ़ाना, और भोग अर्पित करना दर्शाया गया है।
यह भजन एक श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है, जिसमें बताया गया है कि देवी के भक्तों ने उनके मंदिर को बड़े श्रद्धा भाव से सजाया और मंदिर में पूजा अर्चना के लिए हर सामग्री को बड़े श्रद्धा से अर्पित किया। भजन के लेखक और अपलोडर का नाम अनिलरामूर्ती भोपाल है, और यह भजन विशेष रूप से दुर्गा पूजा और नवरात्रि के समय में श्रद्धालुओं द्वारा गाया जाता है।
भजन की हर पंक्ति में देवी के मंदिर की सुंदरता और भक्तों द्वारा की गई पूजा अर्चना का चित्रण किया गया है, जिससे यह भजन एक प्रकार की भक्ति की महिमा को व्यक्त करता है।