हमें जबसे मिला दरबार तेरा
हमें जबसे मिला दरबार तेरा-2
कही आता जाना भूल गए
तेरे चरणो में सर ऐसा झुका-2
हम सर को उठाना भूल गए
हमें जबसे मिला....
मां तु ममता की मूरत है,
तेरे प्यार की कोई सीमा -2
तुने इतना प्यार दिया हमको-2
हम अपना बेगाना भूल गए
हमें जबसे मिला....
यूं तो लाखो दर है जग में,
तेरे दर जैसा कोई दर ही नही-2
जहां छोटे बड़े का फरक नही-2
हम सारा जमाना भूल गए
हमें जबसे मिला....
जबसे तुमको अपनाया है,
मैंने मां सबकुछ पाया_2
तेरे नाम का ऐसा जाम पिया-2
हम होश में आना भूल गए
हमें जबसे मिला....
तू शिक्तशाली मईया है,
सुखसागर है बलवाली है-2
जबसे तेरी भेंटे गाने लगे-2
हर रोग पुराना भूल गए
हमें जबसे मिला....
हमें जबसे मिला दरबार तेरा-2
कही आता जाना भूल गए
तेरे चरणो में सर ऐसा झुका-2
हम सर को उठाना भूल गए
हमें जबसे मिला....
मां तु ममता की मूरत है,
तेरे प्यार की कोई सीमा -2
तुने इतना प्यार दिया हमको-2
हम अपना बेगाना भूल गए
हमें जबसे मिला....
यूं तो लाखो दर है जग में,
तेरे दर जैसा कोई दर ही नही-2
जहां छोटे बड़े का फरक नही-2
हम सारा जमाना भूल गए
हमें जबसे मिला....
जबसे तुमको अपनाया है,
मैंने मां सबकुछ पाया_2
तेरे नाम का ऐसा जाम पिया-2
हम होश में आना भूल गए
हमें जबसे मिला....
तू शिक्तशाली मईया है,
सुखसागर है बलवाली है-2
जबसे तेरी भेंटे गाने लगे-2
हर रोग पुराना भूल गए
हमें जबसे मिला....
श्रेणी : दुर्गा भजन
🙏हमें जब से मिला दरबार तेरा🙏 इस सुन्दर भजन को कृपा एक बार जरूर, जरूर सुने👌
भजन "हमें जबसे मिला दरबार तेरा" माँ दुर्गा के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। इसमें भक्त अपनी पूरी आत्मा से माँ के प्रति अपनी निष्ठा और आभार व्यक्त करता है। भजन की पहली पंक्तियाँ इस भाव को व्यक्त करती हैं कि जब से भक्त ने माँ के दरबार में कदम रखा है, वह सब कुछ भूल चुका है, यहाँ तक कि दुनिया और अपने पूर्व जीवन की परेशानियाँ भी। माँ के चरणों में अपना सिर झुका कर वह अपने सारे दुःख और तनाव भूल गया है।
माँ को ममता की मूर्ति कहा गया है, जिनका प्यार न केवल सीमाहीन है, बल्कि अनमोल और दिव्य है। भक्त महसूस करता है कि माँ का प्यार उसे ऐसे आशीर्वाद से भर देता है कि वह अपना सारा संसार और दुःख-दर्द भूल जाता है।
इस भजन में यह भी बताया गया है कि संसार में कई दरबार हो सकते हैं, लेकिन माँ का दरबार सबसे अलग और खास है। यहाँ छोटा-बड़ा, ऊँचा-नीचा, किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता। माँ के दरबार में सभी समान हैं और सबको एक जैसा प्यार और आशीर्वाद मिलता है।
भजन में भक्त यह भी कहता है कि जब से उसने माँ को अपने जीवन में अपनाया है, वह पूरी तरह से समृद्ध हो गया है। माँ के नाम का जाम पीकर वह अपने होश खो बैठा है और भक्ति के मार्ग पर पूरी तरह से समर्पित हो गया है।
इस भजन का अंतिम भाग माँ के शक्तिशाली रूप, सुखसागर और बलवाली स्वरूप को सम्मानित करता है। भक्त बताता है कि माँ की भेंटें गाने से उसके जीवन के सारे पुराने रोग और परेशानियाँ समाप्त हो गई हैं।
"हमें जबसे मिला दरबार तेरा" एक भावनात्मक और आध्यात्मिक भजन है, जो भक्तों को माँ की शक्ति और प्रेम से भर देता है। यह भजन खासतौर पर नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान गाया जाता है, और भक्तों को माँ के आशीर्वाद से जुड़ा हुआ महसूस कराता है।