दुलरवा लईका जस गीत
ll दुलारवा लईका माता जस गीत ll
महू ल तो थोकिन तै दुलार वो.. दाई,
महू तोर दुलरवा लईका ताव ll
भकती भजन ल तोर गाव वो हो.... दाई ll
महू तोर दुलरा लईका ताव......
दिन रात तोरे कोती,लागे रइथे ध्यान वो ll
नई जानव हे किरपाली, मैहा पूजा पाढ वो
चढ़- भाव भकती ले मै रिझाव वो .... दाई
महू तोर दुलारवा लईका ताव......
मंदिर देवाला म मै, तोरे बइठे रइथव वो ll
आवत जावत सबला माता नाव कईथव वो
चढ़ - दे देना ममता के छाव वो..... दाई
महू तोर दुलरवा लईका ताव......
श्रेणी : दुर्गा भजन
दुलरवा लईका ll माता जसगीत ll Dularwa Laika ll Mata Jasgeet ll Dilesh Sahu ll Pt. Vivek Sharma ll
यह भजन "दुलारवा लईका माता जस गीत" माँ दुर्गा की ममता और कृपा का सुंदर वर्णन करता है। इसमें भजनकार अपने प्रभु और माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त कर रहा है। इस भजन में भक्त माता रानी से अपनी श्रद्धा का इज़हार करते हैं और बताते हैं कि वह हमेशा उनके ध्यान में रहते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।
"महू तोर दुलारवा लईका ताव" का बार-बार उल्लेख, यह संकेत करता है कि भक्ति और पूजा में माता रानी की ममता का ही प्रभाव है, जो भक्तों के जीवन को संजीवनी प्रदान करती है। भजन में दिन-रात माता रानी के प्रति समर्पण और आस्था दिखाई जाती है। भक्त अपने मन में हमेशा माता रानी का ध्यान करता है और उनका नाम लेता है, ताकि वह अपनी ज़िंदगी में सुख-शांति प्राप्त कर सके।
इस भजन का उद्देश्य भक्तों को प्रेरित करना है कि वे अपनी भावनाओं और भक्ति को समर्पित करें, ताकि माता रानी उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करें और उन्हें अपने आशीर्वाद से नवाज़ें। "दुलारवा लईका" शब्द से यह अभिप्रेत है कि भक्त माता रानी के प्रति अपनी गहरी ममता और प्रेम का अनुभव करते हैं।
यह भजन एक आत्मीयता और आस्था का प्रतीक है, और नवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर इसे विशेष रूप से गाया जाता है।