तुम हो बड़े दगाबाज़ कान्हा
तुम हो बड़े दगाबाज़ कान्हा,
दिल मेरा लुट गया आज कान्हा,
कहाँ नहीं ढूंढा तुझे ओ छलिये,
हर गली में हर मधुबन में,
तुम हो बड़े दगाबाज़ ............
वो प्यारी प्यारी तेरी नजरिया,
मासूम तेरा वो भोलापन,
जब तन का देखूं माने ना मन,
दर्शन को तेरे तड़पे है मन,
कहाँ नहीं ढूंढा तुझे ओ छलिये,
हर गली में हर मधुबन में,
तुम हो बड़े दगाबाज़ ............
मैं तेरी राधा तू मेरा मोहन,
नज़रो का जादू असर कर गया,
एक झलक तू दिखला दे कान्हा,
दिल को चुरा के कहाँ छुप गया,
कहाँ नहीं ढूंढा तुझे ओ छलिये,
हर गली में हर मधुबन में,
तुम हो बड़े दगाबाज़ ............
तुझ बिन जी ना लगे अब हमारा,
दासी बना लो चरणों की,
तेरे ही रंग में ऐसी रंगी,
सुध बुध रही ना मुझे अपनों की,
कहाँ नहीं ढूंढा तुझे ओ छलिये,
हर गली में हर मधुबन में,
तुम हो बड़े दगाबाज़ ............
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
तुम हो बड़े दगाबाज़ कान्हा | Tum Ho Bade Dagabaaz Kanha | Krishna Bhajan | Shashi Sachdeva
इस भजन "तुम हो बड़े दगाबाज़ कान्हा" में भक्त की भावनाओं को बेहद सुंदरता से व्यक्त किया गया है। इसमें राधा और कृष्ण के प्रेम की मिठास और विरह वेदना को दर्शाया गया है।
भजन में राधा जी की व्यथा झलकती है, जब वे अपने प्रिय कान्हा को हर गली और वन में खोजती हैं, लेकिन कान्हा कहीं दिखाई नहीं देते। कान्हा के भोलेपन और प्यारी नजरों की बात करते हुए राधा जी अपने मन की बेचैनी को जाहिर करती हैं।
प्रेम की गहराई को दर्शाते हुए, वे कृष्ण से प्रार्थना करती हैं कि वे एक झलक दिखला दें, जिससे उनका तड़पता मन शांत हो सके। कृष्ण के बिना उनका मन असहज और व्याकुल हो जाता है, और वे अपने प्रिय को चरणों में स्थान देने की विनती करती हैं।
यह भजन प्रेम, समर्पण और भक्ति का सजीव चित्रण है, जो हर कृष्ण भक्त के हृदय को छू लेता है।