कर के इशारा बुला ले कान्हा | Kar Ke Ishara Bula Le Kanha

कर के इशारा बुला ले कान्हा



कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

जो तू कान्हा, मथुरा बुलावे,
जो तू कान्हा, मथुरा बुलावे,
यमुना जी में लगाऊं डुपकी,
यमुना जी में लगाऊं डुपकी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

जो तू कान्हा, गोकुल बुलावे,
जो तू कान्हा, गोकुल बुलावे,
गोकुल की कान्हा, मैं खाऊं मिट्टी,
गोकुल की कान्हा, मैं खाऊं मिट्टी
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

जो तू कान्हा, वृंदावन बुलावे,
जो तू कान्हा, वृंदावन बुलावे,
बंसीवट पे सुनू मैं बंसी,
बंसीवट पे सुनू मैं बंसी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

जो तू कान्हा, बरसाना बुलावे,
जो तू कान्हा, बरसाना बुलावे,
राधा जी से पाऊं मैं भक्ति,
राधा जी से पाऊं मैं भक्ति,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
कर के इशारा, बुला ले कान्हा,
आऊ दौड़ी दौड़ी,
आऊ दौड़ी दौड़ी,

Ly rics- Jay Prakash Verma, Indore



श्रेणी : कृष्ण भजन



कर के इशारा बुला ले कान्हा ।। आऊ दौड़ी दौड़ी ।। #priyanjaykeshyambhajan #krishna #newkrishnabhajan

"कर के इशारा, बुला ले कान्हा" एक भक्तिपूर्ण भजन है, जिसमें कृष्ण प्रेमी अपने आराध्य को पुकारते हुए उनके सान्निध्य की अभिलाषा व्यक्त करता है। जय प्रकाश वर्मा, इंदौर द्वारा रचित इस भजन में भक्त की गहन भक्ति और समर्पण झलकती है।

भजन में भक्त कृष्ण को मथुरा, गोकुल, वृंदावन और बरसाना जैसे पावन स्थलों पर बुलाने की प्रार्थना करता है। ये सभी स्थान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े हुए हैं और भक्त का हृदय उन स्मृतियों से ओत-प्रोत है।

"जो तू कान्हा, मथुरा बुलावे, यमुना जी में लगाऊं डुपकी" — यह पंक्ति दर्शाती है कि मथुरा की यमुना नदी में स्नान करना भक्त के लिए आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है। मथुरा, भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है, और वहां जाने की इच्छा भक्त की श्रद्धा को प्रकट करती है।

गोकुल की मिट्टी को चूमने और खाने की इच्छा, "गोकुल की कान्हा, मैं खाऊं मिट्टी," भक्त के प्रेम और भावुक समर्पण को दर्शाती है। यह संदर्भ श्रीकृष्ण के बचपन की उस लीला से जुड़ा है जब उन्होंने मिट्टी खाकर अपनी माता यशोदा को ब्रह्मांड का दर्शन कराया था।

"बंसीवट पे सुनू मैं बंसी" — वृंदावन की बंसीवट को कान्हा की बांसुरी की मधुर ध्वनि से जोड़ा गया है। इस पंक्ति में भक्त की अभिलाषा है कि वह स्वयं कान्हा की बांसुरी की ध्वनि को सुन सके और उसकी दिव्यता का अनुभव कर सके।

अंत में, "राधा जी से पाऊं मैं भक्ति" — यह पंक्ति राधा-कृष्ण की प्रेम भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाती है। भक्त राधा रानी की भक्ति की अनुभूति करने की इच्छा रखता है, क्योंकि राधा जी की भक्ति को सर्वोच्च प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

"कर के इशारा, बुला ले कान्हा" भजन केवल शब्दों का संकलन नहीं है, बल्कि यह भक्त के हृदय से निकली पुकार है। यह भजन सुनने वालों को आध्यात्मिक आनंद और कृष्ण भक्ति की गहराई का अनुभव कराता है।

Harshit Jain

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