कैसी तेरी लीला कैसा ये तेरा खेल | Kaisi Teri Leela Kaisa Ye Tera Khel

कैसी तेरी लीला कैसा ये तेरा खेल



कैसी तेरी लीला, कैसा ये तेरा खेल,
तेरे होते भगवन, क्यों हो गया मैं फेल,

वादा किया था तूने, मुझको जिताएगा,
बिगड़ा नसीबा मेरा, फिर से बनाएगा,
बिगड़ गया क्यों कान्हा, फिर ये सारा खेल,
तेरे होते भगवन, क्यों हो गया मैं फेल,

कैसी तेरी लीला, कैसा ये तेरा खेल,
तेरे होते भगवन, क्यों हो गया मैं फेल,

सब कुछ गंवाया मेने, कुछ ना बचा हैं,
खेल ये कान्हा तूने, कैसा रचा हैं,
बिखर गया हैं जीवन, खतम हो गया खेल,
तेरे होते भगवन, क्यों हो गया में फेल,

कैसी तेरी लीला, कैसा ये तेरा खेल,
तेरे होते भगवन, क्यों हो गया मैं फेल,

जो तूने बोला मेने, सब वो किया हैं,
पूरा भरोसा कान्हा, तुझपे किया हैं,
टूटे ना भरोसा, दिखाओ ऐसा खेल,
तेरे होते भगवन,क्यों हो जाऊ मैं फेल,

कैसी तेरी लीला, कैसा ये तेरा खेल,
तेरे होते भगवन, क्यों हो गया मैं फेल,

Lyri cs - Jay Prakash Verma, Indore



श्रेणी : हनुमान भजन



कैसी तेरी लीला । कैसा ये तेरा खेल । तेरे होते भगवन । क्यों हो गया मैं फेल । #priyanjaykeshyambhajan

"कैसी तेरी लीला, कैसा ये तेरा खेल" भजन मानवीय भावनाओं और ईश्वर के प्रति आस्था की गहराई को दर्शाता है। जय प्रकाश वर्मा, इंदौर द्वारा लिखित यह भजन भक्त की पीड़ा, निराशा और अंततः भगवान पर अटूट विश्वास को खूबसूरती से अभिव्यक्त करता है।

भजन की शुरुआत भक्त के हताश मन से होती है, जो अपनी असफलता पर सवाल उठाता है। "तेरे होते भगवन, क्यों हो गया मैं फेल" — यह पंक्ति दर्शाती है कि भक्त ने भगवान पर संपूर्ण विश्वास रखा था, फिर भी उसे जीवन में हार का सामना करना पड़ा। यह प्रश्न केवल असफलता पर नहीं, बल्कि ईश्वर की लीला को समझने की कोशिश का प्रतीक है।

भजन में भक्त भगवान कृष्ण को उनकी प्रतिज्ञाओं की याद दिलाते हुए कहता है कि उन्होंने वादा किया था कि वे अपने भक्तों को जीत दिलाएंगे और उनके बिगड़े भाग्य को संवारेंगे। लेकिन जब जीवन में संघर्ष और निराशा आती है, तो भक्त खुद को ठगा हुआ महसूस करता है और ईश्वर की योजना को लेकर असमंजस में पड़ जाता है।

"सब कुछ गंवाया मेने, कुछ ना बचा है" — इस पंक्ति में भक्त के हृदय की गहराई से निकली वेदना झलकती है। वह भगवान को उनके रचे हुए खेल को लेकर प्रश्न करता है और अपनी टूटी उम्मीदों को शब्दों में पिरोता है। लेकिन भजन केवल दुख और शिकायत तक सीमित नहीं रहता।

भक्त का विश्वास डगमगाता जरूर है, परंतु वह टूटता नहीं। भजन के अंतिम भाग में भक्त कहता है कि उसने भगवान की हर आज्ञा का पालन किया है और उस पर पूरा भरोसा किया है। "टूटे ना भरोसा, दिखाओ ऐसा खेल" — यह पंक्ति भक्त की आशा और भगवान से पुनः कृपा की प्रार्थना को दर्शाती है।

"कैसी तेरी लीला, कैसा ये तेरा खेल" भजन न केवल भक्त की वेदना को व्यक्त करता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। यह भजन सुनने वाले को आत्मचिंतन करने और अपने विश्वास को और भी दृढ़ करने की प्रेरणा देता है।

Harshit Jain

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