हार के तेरे द्वार पे आया अपनी लाज बचाने
हार के तेरे द्वार पे आया अपनी लाज बचाने,
माँ को तूने वचन दिया था आजा वो निभाने,
के तुझको आना ही होगा, सांवरे आना ही होगा,
दुनिया वाले दर्द किसी का ना पहचाने बाबा,
मेरे मन की मैं ही जानू या तू जाने बाबा,
मेरे दुखड़े सुनले बाबा आया मैं सुनाने,
माँ को तूने वचन दिया था आजा वो निभाने,
के तुझको आना ही होगा, सांवरे आना ही होगा,
अपने नाम की लाज बचाने आजा बाबा श्याम,
जो तू ना आया तो होगा नाम तेरा बदनाम,
भक्तों का विश्वास ना टूटे आजा ना जिताने,
माँ को तूने वचन दिया था आजा वो निभाने,
के तुझको आना ही होगा, सांवरे आना ही होगा,
आज तेरे दरबार से बाबा जाऊँगा ना खाली,
मर जाऊँगा आज यहीं पे मैंने कसम उठा ली,
फिर तो तुझको आना होगा मेरे भाग्य जगाने,
माँ को तूने वचन दिया था आजा वो निभाने,
के तुझको आना ही होगा, सांवरे आना ही होगा,
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
Vachan Nibhane Aaja Sanwre | Baba Khatu Shyam Bhajan | वचन निभाने आजा सांवरे | Sunil Sarvottam
"वचन निभाने आजा सांवरे" भजन में एक भक्त की गहराई से भरी पुकार को दर्शाया गया है, जो अपने दुखों से व्यथित होकर बाबा खाटू श्याम के दरबार में पहुंचा है। इस भजन में भक्त का विश्वास और बाबा के प्रति उसकी अटूट श्रद्धा स्पष्ट झलकती है।
भजन की पंक्तियों में भक्त ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बाबा से अपनी लाज बचाने की विनती की है। भक्त को विश्वास है कि बाबा ने अपनी माता को जो वचन दिया था, उसे वे अवश्य निभाएंगे। यह भजन बाबा श्याम की कृपा और उनके भक्तों के प्रति उनकी संवेदनशीलता का जीवंत चित्रण करता है।
भक्त की पुकार में जहां दर्द है, वहीं एक दृढ़ विश्वास भी है कि बाबा उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटाएंगे। दुनिया के छल और उपेक्षा से आहत भक्त अपने अरमानों और दुखों को सांवरे के चरणों में समर्पित कर देता है। वह बाबा से अपने नाम की लाज बचाने और भक्तों के विश्वास को टूटने से बचाने की प्रार्थना करता है।
"वचन निभाने आजा सांवरे" भजन न केवल भावनाओं का बहाव है, बल्कि यह हर उस भक्त की व्यथा को भी दर्शाता है, जो जीवन में कठिन समय में ईश्वर को पुकारता है। सुनील सर्वोत्तम की आवाज़ में गाया गया यह भजन भक्तों के मन में भक्ति की गहराई को और अधिक बढ़ा देता है, और खाटू श्याम जी के प्रति आस्था को और भी प्रगाढ़ कर देता है।