ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया,
ओ श्याम रे मेरी भर दो गगरिया,
भर दो भरा दो मेरे सिर पर धरा दो
ओ सांवरे बतला दो डगरिया
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया.....
दिल्ली शहर एक खुली है बजरिया,
ओ सांवरे मुझे ला दो चुनरिया,
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया.....
पहन ओढ़ अंगना हुई ठाडी,
ओ सांवरे मुझे लग गई नजरिया,
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया.....
दिल्ली शहर एक वैध का लड़का,
ओ सांवरे दिखला दो नबजिया,
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया.....
वैध का लड़का बड़ो छल बलिया,
ओ श्याम रे मोसे मांगे ननदिया,
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया.....
सांस मेरी ले जाना जेठानी मेरी ले जा,
ओ सांवरे नहीं दूंगी ननदिया,
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया.....
सांस तेरी बूढ़ी जेठानी तेरी काली,
हो राधिके तेरी गोरी ननदिया,
ओ सांवरे मेरी भर दो गगरिया.....
श्रेणी : कृष्ण भजन
यह गीत एक प्यारी लोक रचना है, जिसमें श्याम के प्रति श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त किया गया है। गगरिया भरने की बिनती में यह गीत प्रेम और आस्था की गहराई को दर्शाता है। इस गीत में सांवरे, श्याम और राधा के प्रति भक्तों का स्नेहपूर्ण अनुराग झलकता है। दिल्ली शहर, वैध के लड़के, और ननदिया जैसी शाब्दिक चित्रण से गीत में सांस्कृतिक परिपाटी और भारतीय परिवारों के बीच के रिश्तों की झलक मिलती है।
गीत में वर्णित दर्द, प्यार और तीव्र भावनाओं को प्रस्तुत करते हुए, यह रचना दिल को छूने वाली है। ऐसी रचनाएँ हमारी सांस्कृतिक धरोहर का अहम हिस्सा हैं और हमें इन्हें सहेजकर रखना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इसका अनुभव कर सकें।